सेरेब्रल पालसी से प्रभावित बच्चों के अभिभावकों के लिए दिशा निर्देश ------

सेरेब्रल पालसी के लक्षण क्या है एवं कैसे पता चलेगा कि मेरे बच्चें को सेरेब्रल पालसी है ?

यदि जन्म के समय बच्चें का वजन 1.5 किलों से कम रहा हो, बच्चें का जन्म 7 महीने से कम की गर्भावस्था के बाद हुआ हो, जन्म के समय आक्सीजन की कमी, गंदा पानी पी लेना, तेज पीलिया होना, मस्तिष्क ज्वर का होना, मिर्गी (झटका) आना, शरीर की मांसपेशियों में सामान्य प्रतिक्रिया का न होना, शरीर में बहुत ढीलापन या सख्तपन होना, लार का टपकना, परिवार के सदस्यों को देखकर प्रतिक्रिया न करना, शरीर में अनियंन्त्रित गति का होना, सामान्य बच्चें की तरह क्रियाकलाप जैसे बिस्तर पर पलटना, गर्दन का रोक पाना, बैठना, खड़े होना आदि नही हो पाता है। तो बच्चें को सेरेब्रल पालसी हो सकती है।

क्या सेरेब्रल पालसी ठीक हो सकती है ?

मस्तिष्क में हुई क्षति को किसी भी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है। कितुं इससे होने वाली अक्षमता को कम कर बच्चें को दैनिक क्रियाकलापों के लिए उच्च कोटि का प्रशिक्षण दिया जा सकता है। एक विशेष फिजियोथैरेपी एवं दैनिक क्रियाकलापों में ट्रेनिगं देकर 80 प्रतिशत बच्चों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। 

सेरेब्रल पालसी के इलाज के लिए सामान्य एवं विशेष कसरत में क्या अन्तर है ?

हाथ और पैरों में गति एवं खींचाव वाली सामान्य कसरत से किसी तरह का फायदा तो कम होता है परतंु इससे नुकसान अवश्य हो सकता है। सेरेब्रल पालसी बच्चों को विशेष कसरत एवं प्रशिक्षण की जररूत होती है। ऐसे बच्चों को सामान्य नवजात शिशुओं में होनी वाली दैनिक प्रक्रिया की तरह गर्दन रोकने, करवट लेने, बैठने, खड़े होने एवं चलने में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इन बच्चों में स्पीच थैरेपी, लार गिरने से रोकने, खाना निगलने एवं बोलने में मदद करती है। ऐसे बच्चों में 60 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों की बुद्वि सामान्य होती है। अतः इन बच्चों को सामान्य स्कूलों में पढ़ाने से इनका सर्वंागीण विकास होता है। ऐसे बच्चों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए ज्यादा से ज्यादा सामाजिक कार्यक्रमों में ले जाना अति आवश्यक होता है।

हमें ऐसे बच्चों को लेकर प्रयागराज (इलाहाबाद) में ही आकर क्यों रूकना जरूरी है ?

ऐसे बच्चों को शुरूआती दिनों में गहन कसरत एवं खुद को प्रशिक्षण की जरूरत होती है। प्रयागराज स्थित त्रिशला फाउंडेेशन के पुनार्वास केन्द्रों पर फिजियोथैरेपिस्ट सेरेब्रल पालसी के इलाज के लिए विशेष तरीके से प्रशिक्षित किये गये है। यहां आने पर बच्चों का सर्वप्रथम गहन अघ्यन करना होता है। तत्तपश्चात् फिजियोथैरेपिस्ट द्वारा दिन में 2 बार कसरत के साथसाथ अभिभावकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। बोलने की समस्या के लिए स्पीच थैरेपी और पढ़ाईलिखाई में प्रशिक्षण के लिए स्पेशल एजुकेशन दिया जाता है। ऐसे बच्चों के लिए समयपर खेलकूद एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। इन बच्चों को उनकी समस्या एवं उम्र के अनुसार कम से कम 3 से 6 महीनें तक रूकने की जरूरत होती है। इस अविधि में बच्चों में कुछ सुधार होने के साथसाथ अभिभावकों को अपने बच्चें की सभी समस्याओं एवं उनके समाधान की जानकारी भी हो जाती है। घर वापस जाने पर भी कसरत 15-16 साल की उम्र तक निरन्तर कराते रहना चाहिए एवं एक निश्चित अवधि पर प्रयागराज आकर दिखाना आवश्यक है

सेरेब्रल पालसी से प्रभावित बच्चों को सर्जरी एवं बाटुलिनम टाक्सिन की जरूरत कब और क्यों पड़ती है ?

सेरेब्रल पालसी बच्चों के इलाज में बच्चों की विशेष फिजियोथैरेपी एवं खुद के प्रशिक्षण की आवश्यता अधिक होती है। बाटुलिनम टाक्सिन 2 से 6 साल के बच्चों में मांसपेशियों में सख्तपन ज्यादा होने पर दी जाती है। सर्जरी की जरूरत मांसपेशियों में बहुत ज्यादा सख्तपन, जोड़ो एवं हडियों में तिरछापन आने पर पड़ती है। सर्जरी करने से पहले बच्चों की विस्तृत जांच, चलने का विडियों एवं सर्जरी के दौरान दुबारा जांच की पड़ती है। सामान्यतः 7 साल की उम्र के पहले सर्जरी नहीं करते है। सर्जरी की जरूरत केवल कुछ ही बच्चों में पड़ती है। अत्याधुनिक सर्जरी के तौर तरीकों से मांसपेशियों में अपेक्षाकृत सर्जरी कम, हडियों की सर्जरी ज्यादा करने की कोशिश होती है। जिससे मांसपेशियों में कमजोरी न आने पाये। सर्जरी के बाद भी कसरत को बंद नहीं किया जाता है।

सेरेब्रल पालसी बच्चों में ठीक होने की कितनी संभावना होती है ?

हमारा उदेश्य ऐसे बच्चों को उनकी क्षमता के उच्च स्तर पर लेकर जाना है। ऐसे बच्चों को पूर्णतः ठीक नहीं किया जा सकता किन्तु 70 प्रतिशत बच्चों को स्वावलंम्बी बनाया जा सकता है। यह 70 प्रतिशत बच्चें पढ़-लिखकर नौकरी एवं अपना व्यवसाय कर खुशहाल जिन्दगी जी सकते है। 20 प्रतिशत बच्चों को थोड़ा सहारा एवं 10 प्रतिशत बच्चों को पूर्ण सहायता की जरूरत होती है।

सेरेब्रल पालसी बच्चों की मुत्यु सी.पी. के वजह से होती है ?

ऐसे बच्चों की मुत्यु सी0पी0 की वजह से नहीं होती है। सी0पी0 जानलेवा समस्या नहीं है। और सी0पी0 बच्चों की उम्र सामान्य व्यक्तियों जैसी होती है। ऐसे बच्चों की आकस्मिक एवं जल्दी मुत्य अनियंत्रित झटके, सक्रमंण, हद्रय एवं फेफड़े की बिमारिया इत्यादि कई अन्य कारणों से होती है।

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